अज़ान क्या है ?

एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार संसार में हर समय गुंजने वाली आवाज़ अज़ान है। इंडोनेशिया से फज्र का समय आरंभ होकर सुमात्रा तक आ जाता है। यह सिलसिला मलाया,ढ़ाका और पूरे भारत के बाद पाकिस्तान में शुरू हो जाता है। उसके बाद अफ्गानिस्तान, मस्क़त,सऊदी अरब, यमन, इराक़ में अज़ान शुरू हो जाती है। फिर मिस्र, इस्तैंबूल, ट्राइपोलि, लीबिया, नॉर्थ अमेरिका में अज़ान का समय हो जाता है। और ऐसे ही फज्र की अज़ान 9 घंटे का सफर तै करती है तो इंडोनेशिया में ज़ुहर का समय हो जाता है। इस प्रकार पाँच समय की अज़ान से संसार में एक भी ऐसा सिकण्ड नहीं जब अज़ान की आवाज़ न गूंज रही हो।

एक सांस्कृतिक सभा में एक बार हमने अपने देशवासियों से यह प्रश्न किया कि अज़ान क्या है ? अधिकांश लोगों का उत्तर था कि अज़ान में ईश्वर को पुकारा जाता है, कुछ लोगों ने कहा कि यह ईश्वर की भक्ति का एक नियम है। जबकि एक सज्जन ने कहा कि अज़ान में अकबर बादशाह को पुकारा जाता है। अज़ान के सम्बन्ध में अपने देशवासियों के यह उत्तर सुन कर बड़ा आश्चर्य हुआ और दुख भी कि हम सब अपने देश में शताब्दियों से एक साथ रहने के बावजूद एक दूसरे की धार्मिक संस्कृति के प्रति संदेह में पड़े हुए हैं अथवा दोषपूर्ण विचार रखते हैं।
वास्तविकता यह है कि अज़ान में न तो ईश्वर को पुकारा जाता है, न अकबर बादशाह को, और न ही यह पूजा करने का कोई तरीक़ा है। बल्कि इसके द्वारा लोगों को नमाज़ के समय की सूचना दी जाती है ताकि लोग मस्जिद में उपस्थित हो कर सामूहिक रूप में ईश्वर की भक्ति करें।
ईश्-भक्ति हेतु हर मुसलमान पुरुष एवं स्त्री पर दिन और रात में पाँच समय की नमाजे़ अनिवार्य की गई हैं जिनकी अदाएगी महिलाओं को अपने घर में करनी होती है परन्तु पुरुषों को आदेश दिया गया है कि वह उन्हें मस्जिद में जाकर सामुहिक रुप में अदा करें। पाँच समय की यह नमाजें ऐसे समय में भी आती हैं जिसमें एक व्यक्ति सोया होता है या अपने कामों में व्यस्त होता है, अतः ऐसे माध्यम की अति आवश्यकता थी जिसके द्वारा लोगों को नमाज़ों के समय के सूचित किया जा सके। अज़ान इसी उद्देश्य के अंतर्गत दी जाती है। परन्तु इस्लाम का कोई भी आदेश केवल आदेश तक सीमित नहीं होता बल्कि उसमें मानव के लिए पाठ भी होता है। अज़ान के शब्दों पर चिंतन मनन करने से हमें यही बात समझ में आती है। इस विषय में इस्लाम के एक महान विद्वान शाह वलीउल्लाह देहलवी लिखते हैं।