ईशग्रंथ कु़रआन में स्त्रियों से संबंधित शिक्षाएं

 तुम्हारे लिए रोज़ों में रातों में अपनी स्त्रियों (पत्नियों) के पास जाना जायज़ (वैध) कर दिया गया। वे तुम्हारा लिबास हैं और तुम उनका लिबास......। (2:187)
• तुम्हारी स्त्रियां (पत्नियां) तुम्हारी खेती1 हैं। अतः जिस प्रकार चाहो अपनी खेती में जाओ और अपने लिए आगे भेजो (अर्थात् अपनी नस्ल को आगे बढ़ाओ) और अल्लाह की अप्रसन्नता से बचो, भली-भांति जान लो कि तुम्हें (मृत्यु पश्चात्) उससे मिलना है। और (ऐ नबी!) ईमान ले आने वालों को (सफलता की) शुभ सूचना दे दो। (2:223)
1. (पति और पत्नी का रिश्ता किसान और खेती जैसा है। किसान अपनी खेती से अति प्रेम करता, बहुत लगाव रखता, उसकी रक्षा करता, उसे किसी के क़ब्ज़ा व अतिक्रमण आदि से बचाता है। उसमें झाड़-झंखाड़ नहीं उगने देता, उसमें खाद डालता, बीज डालता है, फसल उगाता, सींचता, लू और पाला आदि से बचाता, बरबाद या क्षतिग्रस्त होने से रक्षा करता है। उसके इस व्यवहार, निष्ठा और परिश्रम से उसकी खेती, उसके और मानवजाति के लिए लाभदायक सिद्ध होती है। इसी लिए इस आयत में पति और पत्नी के बीच संबंध को किसान और खेती के बीच संबंध के रूप में बयान किया गया है।) 
• मासिक धर्म (Menstruation) के दिनों में स्त्रियों (अपनी पत्नियों) से अलग रहो और उनके पास न जाओ जब तक कि वे पाक-साफ़ न हो जाएं। फिर जब वे अच्छी तरह पवित्र व स्वच्छ (पाक-साफ़) हो जाएं तो जिस तरह अल्लाह ने तुम्हें बताया है, उनके पास जाओ......। 
(2:222)
• जो लोग अपनी स्त्रियों (पत्नियों) से अलग रहने की क़सम खा बैठें, उनके लिए चार महीने की प्रतीक्षा है फिर यदि वे पलट जाएं तो अल्लाह अत्यंत क्षमाशील दयावान है। और यदि वे तलाक़ ही की ठान लें तो अल्लाह भी सुनने वाला, भली-भांति जानने वाला है। (2:226,227)
• तलाक़ के बारे में और स्त्रियों से संबंधित आदेश (2:228-233, 236,137)।
• और तुम में से जो लोग मर जाएं और अपने पीछे पत्नियां छोड़ जाएं, तो वे पत्नियां अपने आपको चार महीने और दस दिन तक रोके रखें। फिर जब वे अपनी निर्धारित अवधि (इद्दत) पूरी कर चुकें तो सामान्य नियम (मअरुफ़) के अनुसार वे अपने लिए जो कुछ करें (यानी पुनर्विवाह करें, अथवा न करें), तुम पर इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं। जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसकी ख़बर रखता है। (2:234)
• मनुष्य को चाहत की चीज़ों से प्रेम शोभायमान प्रतीत होता है कि वे स्त्रियां, बेटे, सोने-चांदी के ढेर और निशान लगे (चुने हुए) घोड़े (यानी सवारी आदि के व्यक्तिगत साधन) हैं और चैपाए और खेती। यह सब सांसारिक जीवन की (अस्थाई, नश्वर) सामग्री है और अच्छा (व चिरस्थाई सामग्रियों वाला) ठिकाना तो अल्लाह के पास है (जो परलोक जीवन में सत्कर्मियों को मिलने वाला है)। (3:14)
• और (विवाह हो जाने पर) स्त्रियों (पत्नियों) को उनके मह्र (स्त्री-धन) ख़ुशी से अदा कर दो। हां अगर वे अपनी ख़ुशी से उसमें से तुम्हारे लिए छोड़ दें तो तुम उस (धन) को अच्छा और पाक (जायज़) समझ कर खा सकते हो। (4:4)