हदीस और आधुनिक विज्ञान

आज से चौदह शाताब्दि पूर्व मुहम्मद सल्ल0 ने कुछ ऐसे तथ्य की ओर संकेत किया था जिनका समर्थन आज के आधुनिक युग में विज्ञान पूर्ण रूप में करता है। इस लेख में हम तीन उदाहरणों द्वारा इस विषय की व्याख्या करेंगे।
मक्खी के एक पैर मैं बीमारी, दूसरे में शिफा:
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "यदि तुम में से किसी के पीने की वस्तुओं (पानी, दूध आदि) में मक्खी गिर पड़े तो उसे चाहिए कि उसे ड्रिंक में डुबकी दे, फिर उसे निकाल फेंके, क्योंकि उसके एक पैर मैं बीमारी है तो दूसरे में शिफा।"

 

डॉक्टर मोहम्मद मोहसिन खान इस बारे में लिखते हैं: "चिकित्सा ने यह सिद्ध किया है कि मक्खी अपने शरीर के साथ कुछ जीवाणु उठाए फिरती है, जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने 1400 साल पहले बयान फ़रमाया जब इंसान आधुनिक चिकित्सा के बारे में बहुत कम जानते थे..... हाल अनुभव से पता चलता है कि एक मक्खी बीमारी (जीवाणु) के साथ साथ जीवाणु का इलाज भी उठाए फिरती है. आमतौर पर जब मक्खी किसी भोजन को छूती है तो वह उसे अपने जीवाणु से दूषित कर देती है इसलिए उसे पीने की चीज़ में डुबकी देनी चाहिए ताकि वे जीवाणु की शिफा भी इसमें शामिल हो जाए।

 

कुत्ता चाट जाए तो बर्तन को सात बार धोना क्यों मुहम्मद सल्ल0 के प्रवजनों में आता है कि जब कुत्ता बर्तन को चाट जाए तो उसे सात बार धोया जाए जिसमें पहली बार मिट्टी से। (सही मुस्लिम,अत्तहारः, बाब हुक्म वुलूग़िल कल्ब, हदीस न0 279) 
इस हदीस की व्याख्या बलोगुल-मराम (अंग्रेजी) में इस प्रकार की गई है:

 

यह स्पष्ट है कि किसी चीज़ की केवल नापाकी से सफाई के लिए उसे सात बार धोना ज़रूरी नहीं, किसी चीज को सात बार धोने का रहस्य मात्र सफाई करने से भिन्न है। आज के चिकित्सा विशेषज्ञ कहते हैं कि कुत्ते की आंतों में जीवाणु और लगभग 4 मिमी लंबे कीड़े होते हैं जो उसके फज़ले के साथ बाहर होते हैं और उसके गुदा के आसपास बालों से चिमट जाते हैं, जब कुत्ता उस जगह को ज़बान से चाटते है तो ज़बान इन जीवाणुओं से दूषित हो जाती है, फिर कुत्ता अगर किसी बर्तन को चाटे या इंसान कुत्ते का चुम्बन ले जैसे यूरोपीय और अमेरिकी महिलाएं करती हैं तो जीवाणु कुत्ते से बर्तन या औरत के मुँह में स्थानांतरित हो जाते हैं और फिर वह मनुष्य के आमाशय में चले जाते हैं, यह जीवाणु आगे गतिशील रहते और रक्त कोशिकाओं में घुस कर कई घातक बीमारियों का कारण बनते हैं क्योंकि इन जीवाणुओं का निदान खुर्दबीनी टेस्टों के बिना संभव नहीं. इस्लाम ने एक आम आदेश के अंतर्गत कुत्ते के लुआब को अपवित्र ठहराया और निर्देश दिया कि जो बर्तन कुत्ते के लुआब से प्रदूषित हो जाए उसे सात बार साफ किया जाए और उनमें से एक बार मिट्टी के साथ धोया जाए। (बुलूगल-मराम (अंग्रेजी) दारुस्सलाम, पृष्ठ: 16 हाशिए: 1)