ईश्वर क्या है ?


हम अल्लाह के बारे में सिर्फ और सिर्फ अल्लाह से है जान सकते हैं। और यह दो रास्तों से ही संभव है:

पहला: उन आयातों से जिन्हें अल्लाह ताला ने अपनी पुस्तक कुरान मजीद में रहस्योद्घाटन किया और नबी सल्लालाहू अलैहि वसल्लम के शब्दों में जो उन्होंने हमें अल्लाह के बारे में बताया।

दूसरा: अल्लाह ताला के पैदा किये हुवे प्राणियों से उस कई बनाये हुवे इस संपूर्ण जगत से ।

इन दो मार्गों से हमें अल्लाह की महानता उस की एकता रुबुबियत उलुहियत और उस के नामों में पता चलती है । और कुरान मजीद इन जैसी आयातों से भरी हवी है रही बात छंद ब्रह्मांडीय की तो यह जगत खुली किताब है सरे मानुष इसे किसी भी भाषा में पढ़ सकते हैं और हर तरह के निवासियों इसे अपनी भुद्धि द्वारा पढ़ और  समझ सकता है ।

अल्लाह शब्द का मूल

“अल्लाह”शब्द का मूल अरबी है lइस्लाम से पहले अरबों द्वारा इस नाम का प्रयोग रहा हैlऔर “अल्लाह”का शब्द परमेश्वर सर्वशक्तिमान के लिए बोला जाता था जिसका कोई साझेदार नहीं है lइस्लामी अवधि से पहले अज्ञानता के समय में अरब उसपर ईमान रखते थे, लेकिन वे अन्य देवताओं को भी उसके साथ साथ पूजते थे और कुछ लोग उसकी उपासना में मूर्तियों को भी शामिल किया करते थे l

अल्लाह का अस्तित्व और उसकी विशेषताएँ

(विश्वासियों और नास्तिक दोनों) बल्कि सारे लोगों के बीच इस बात पर एकमत होना संभव है कि अल्लाह के अस्तित्व और विशेषताओं की सच्चाई तक पहुंचने के लिए एक ही रास्ता है और वह है शुद्ध वैज्ञानिक तर्क का रास्ता lक्योंकि इस बात से हर कोई सहमत हैं कि हर काम के लिए कोई न कोई करनेवाला होता है और हर चीज़ के लिए कोई न कोई कारण होता है lइस से कोई चीज़ बाहर नहीं हैlकोई भी चीज़ बिना कारण या ऐसे ही नहीं हो जाती है lकोई न कोई कारण या कोई न कोई वजह ज़रूर होती है lइसके लिए उदाहरण अनगिनत हैं जो सभी जानते हैं lऔर पूरा ब्रह्माण्ड अपने सभी जीवित या निर्जीव, स्थिर और चलनेवाली  चीज़ों और वस्तुओं के साथपहले नहीं था फिर हुआ lतर्क और विज्ञान दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि कोई ऐसा अस्तित्व है जिसने ब्रह्मांड को बनाया है lचाहे उसका नाम अल्लाह हो या निर्माता या सिरजनहार या सृष्टा lइस से उसकी वस्तुता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है lइसलिए पूरा ब्रह्मांड अपनी सारी चीजों के साथ एक निर्माता के होने पर साफ़ प्रमाण है l

और इस रचयिता के गुणों की पहचान उसकी रचनाओं, कामों और आविष्कारों के अध्ययन और उनमें चिंतन और विचार के माध्यम से होती है lउदाहरण के लिए एक पुस्तक को ही ले लीजिए जो लेखक के ज्ञान और अनुभव और संस्कृति, और उनकी शैली, उनकी सोच और उनके करने की शक्ति और विश्लेषण करने की क्षमता का पता देती है lइसी तरह सारी चीज़ें अपने अपने निर्माता की विशेषताओं के बारे में एक व्यापक विचार देती है lयदि लोग ब्रह्मांड और उसकी प्राणियों और उसकी रचनाओं के बारे में भी इसी वैज्ञानिक तर्क का उपयोग करें तो रचयिता और सिरजनहार की विशेषताओं की जानकारी तक पहुँच सकते हैं lसमुद्र और प्रकृति की सुंदरता, कोशिकाओं की बारीकी और उनकी विशेषताएं, ब्रह्मांड के संतुलन और उसके चलने का सिस्टम, इन तथ्यों के बारे में मानव विज्ञाननेजो कुछ भी सामने लाया है यह सब के सब सिरजनहार की महानता और निर्माता के ज्ञान और बुद्धि का संकेत देते हैं l

चाहे लोग संसार को पैदा करने के कारण के विषय में सहमत हो सकें या न हो सकें, और जीवन में कठिनाइयों और दर्द के पाए जाने के पीछे कारण के विषय में सहमति हो या न हो लेकिन इससे वह परिणाम प्रभावित नहीं होता है जो सही वैज्ञानिक तर्कके द्वारा निकला है कि एक अस्तित्व है जो रचयिता, महान, जानकार, ज्ञानी और बुद्धिमान है और उसीको मुसलमान लोग “अल्लाह” कहते हैं l