ला इलाहा इल्लल्लाह का अर्थ और शर्तें


गवाही या धार्मिक पंथ को शहादतैन या शहादाह कहते है, जिसके दो हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा कालिमा ए ताव्हीद (ला-इलाहा इल्लल्लाह) और दूसरा हिस्सा कालिमा ए रिसालत (मुहम्मद रसूल अल्लाह की गवाही)। इस्लाम में यह वसीयतनामा अन्य सभी विश्वासों और प्रथाओ के लिए एक आधार है।

शहादाह का पहला हिस्सा है ला-इलाहा इल्लल्लाह जिसका माना है - कोई देवता अल्लाह के अलावा  इबादत करने के योग्य नहीं। 

भविष्यद्वक्ताओं का आम संदेश

यह वही संदेश है जिसे आदम, नुह, इब्राहीम, मूसा, इसा (अल्लाह की शांति इन पर) और आखरी में मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इंसानियत तक पहुँचाया। खुरान सुरह अंबिया 21:25 यह गवाही स्वर्ग की कुंजी है। हर कुंजी के लकीरें है। आप कुंजी सही लकीरें के साथ आते हैं, तो आप के लिए दरवाजे खोल दिया जायेंगे। आदेश में इस गवाही के माध्यम से स्वर्ग को प्राप्त करने के लिए ला-इलाहा इल्लल्लाह के शर्तो को पूरा करना चाहिय। (तफसीर इब्न कसीर में उल्लेख किया है)

"ला इलाहा इल्लल्लाह" की गवाही का अर्थ

"ला इलाहा इल्लल्लाह" की गवाही का अर्थ यह है कि: अल्लाह तआला के सिवाय हर चीज़ से इबादत (उपासना और पूजा) की पात्रता का इनकार करना, और उसे एक मात्र सर्वशक्तिमान अल्लाह के लिए साबित करना जिसका कोई साझी नहीं, अल्लाह तआला का फरमान है: "यह सब इस लिए कि अल्लाह ही सत्य है और उसके अतिरिक्त जिसे भी यह पुकारते हैं वह असत्य है, और नि:सन्देह अल्लाह ही सर्वोच्च और महान है।" (सूरतुल हज्ज: 62)

शब्द (ला इलाहा) अल्लाह के अलावा पूजी जाने वाली सभी चीज़ों का इनकार करता है, और शब्द (इल्लल्लाह) हर प्रकार की इबादत को केवल अल्लाह के लिए सिद्ध करता है। अत: उसका मतलब यह है कि : अल्लाह के सिवाय कोई सत्य पूज्य नहीं है।

तो जिस तरह अल्लाह तआला का उसके अधिराज्य में कोई साझी नहीं उसी तरह अल्लाह सुब्हानहु व तआला का उस की पूजा और उपासना में भी कोई साझी नहीं।

ला-इलाहा इल्लल्लाह की शर्तें

पहली शर्त  

इल्म (ज्ञान) : इस कलिमा का जो अर्थ है उसे इस तौर पर जानना जो इस से अज्ञानता को समाप्त कर दे, अल्लाह तआला का फरमान है :"तो आप जान लें कि अल्लाह के अलावा कोई सच्चा पूज्य (मा’बूद) नहीं।" (सूरत मुहम्मदः 19)

तथ अल्लाह तआला ने फरमाया : "हां, जो सच बात (अर्थात् ला-इलाहा इल्लल्लाह) को स्वीकार करें और उन्हें इसकी जानकारी भी हो।" अर्थात् उनकी ज़ुबानों ने जिस चीज़ का इक़रार किया है उनके दिल उस का अर्थ जानते हों।

तथा सहीह मुस्लिम में उसमान रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि उन्हों ने कहा कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "जिस की मौत इस ह़ालत में हुई कि वह जानता हो कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं तो वह जन्नत में दाख़िल होगया।"