मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत और आपका संक्षिप्त जीवन चरित्र


अल्लाह के रसूल मुहम्मद अल्लाह द्वारा भेजे गए अंतिम रसूल व नबी है| आप के बाद प्रलय तक अब कोई नबी आने वाले नहीं है| आप पर भेजी गयी आसमानी किताब ‘खुरआन’ है और यही अंतिम दैव वाणी है|

नुबुव्वत के संकेत

अल्लाह ने रसूल मुहम्मद के लिए बहुत सि निशानियाँ  बताई जो आप की नबुव्वत की भूमिका थी|

  1. इब्राहीम अलैहिस्सलाम की दुआ और ईसा अलैहिस्सलाम की शुभ सूचना|अल्लाह के रसूल मुहम्मद अपने बारे में स्वयं फरमाते है, “मै इब्राहीम की दुआ और ईसा की शुभ सूचना हूँ |”  (सिलसिला सहीहा: 1546)

    अल्लाह के रसूल मुहम्मद के कहने का तात्पर्य यह है कि मै इब्राहीम अलैहिस्सलाम  की दुआ का नतीजा इसलिए कि इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे इस्माईल अलैहिस्सलाम के साथ मक्का में काबा के निर्माण के समय कहा था|

    “ऐ हमारे पालनहार! तू हम से इस (नेक काम) को कबूल कर| तू ही सुनता और जानता है| ऐ हमारे मौला! हम को अपना आज्ञाकारी बंदा बना और हमारी औलाद में से भी एक ग्रोह को अपना आज्ञाकारी कीजिये और तू हम को हमारी उपासना के तरीके बता और तू हम पर रहम फरमा| तू ही है तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान|” 

    “ऐ हमारे पालनहार! तू उन्ही में से एक रसूल पैदा कीजियो, जो उनको तेरी आयतें पढ़कर सुना दे और आसमानी किताब और सदाचार की बातें उनको सिखा दे और उनको पाक साफ कर दे| निससंदेह तू प्रभुत्वशाली और बड़ी हिकमत वाला है|” (सूरह बक़रह: 127 – 129)

    तो अल्लाह ने इब्राहीम और इस्माईल अलैहिमुस्सलाम की दुआ स्वीकार की| उनकी संतान में से अल्लाह के रसूल मुहम्मद को अंतिम नबी चुन लिया और ईसा अलैहिस्सलाम की शुभ सूचना का मतलब यह है कि अल्लाह के नबी ईसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के रसूल मुहम्मद के नबी होने की शुभ सूचना दी थी जैसा कि अल्लाह फरमाता है :  “और जब ईसा बिन मरयम ने कहा था कि ऐ इस्राईल के बेटो! मै तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल होकर आया हूँ, मै अपने से पहली किताब तौरात की तस्दीक करता हूँ और एक रसूल की शुभ सूचना देता हूँ|” (सुरह सफ्फ: 6)

    ईसा अलैहिस्सलाम ने एक ऐसे नबी की शुभ सूचना दी जो उनके बाद आएगा और उसका नाम अहमद होगा और अहमद मुहम्मद के नामों में से एक नाम है|

  2. अल्लाह के रसूल मुहम्मद का अरब में पैदा होना – अरब ऐसी जाती थी जो उस समय की जातियों में सबसे श्रेष्ठ और उच्च मानी जाती थी यहाँ तक कि इस आध्यात्मिक सुधार और सम्मानित व सभ्य काम के लिए तैयार हो गयी जो दीन इस्लाम के रूप में वहाँ उतारा गया| यद्यपि यह जाती अज्ञानी, अनपढ़ और मूर्ती पूजा करने वाली और आपस में लडाई झगड़ों के कारण फूट का शिकार थी, इस सबके बावजूद अरब जाती अपनी राय और व्यक्तिगत आज़ादी के लिए प्रसिध्ध थी जबकि दूसरी जातियां धार्मिक व सांसारिक दासता का शिकार थी, उनपर इस बात की पाबन्दी थी कि वे ज्योतिषियों के बताये हुए धार्मिक आदेशों के अलावा किसी बात को समझे या किसी संसारिक या बौध्धिक समस्या में ज्योतिषियों का विरोध करे| जिस प्रकार की उन पर आर्थिक और नागरिक लेन देन की पाबंदियान थी और अरब जाती समस्त कार्यों के लिए इन सब पाबंदियों से आज़ाद थी जबकि दूसरी जातियां बादशाहों, सरदारों के अधीन थी| सबसे बड़ी विशेषता जिससे अरब प्रमुख थे वह यह थी कि वे लोगों में सबसे अधिक सुशील थे जबके दूसरी जातियां हर ओर और पैसों में उनसे अधिक प्रगतिशील थी| अल्लाह ने इस उम्मत को इस महान सुधार कार्य के लिए तैयार किया जो  मुहम्मद के ज़िम्मे आया|
  3. परिवार की शराफत (सज्जन लोग) : आप का परिवार शरीफ (सज्जन) परिवार था, अल्लाह ताला का इरशाद है :  “निस्संदेह अल्लाह ने आदम और नूह को, इब्राहीम और इमरान के परिवार को (जो मसीह के नाना थे) सर्वश्रेष्ट किया था|” (सुरह आले इमरान : 33 )

    अल्लाह ने उन लोगों को नुबुव्वत व मार्गदर्शन से सुशोभित किया और कुरैशी किनाना से और बनी हाशिम को कुरैश से चुना और बनू हाशिम से अल्लाह के रसूल मुहम्मद को चुना| इस प्रकार इस्माईल की संतान अगले और पिछले लोगों में सबसे श्रेष्ट थी जिस प्रकार इसहाक की संतान बीच के दौर के लोगों में बेहतर थी| अल्लाह ने कबीले कुरैश को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें अल्लाह ने बड़े गुणों से सुशोभित किया था मुख्य रूप से मस्जिदे हराम की सेवा और मक्का में आबाद होने के बाद| इसलिए कि यह इस्माईल की संतान में गौत्र वंश में सबसे उच्च व श्रेष्ठ थे और सबसे अधिक बोलचाल में अच्छी शैली वाले थे| अल्लाह ने बनु हाशिम को इसलिए चुना कि वे चरित्र व आचरण वाले थे और लडाई व जंग के समय सबसे अधिक संधि करने को पसंद करने वाले थे| यतीम व फ़कीर के लिए सबसे अधिक दयालु थे, सार यह कि मुहम्मद  का परिवार समस्त जातियों पर श्रेष्ठ चरित्र एवं आचरण की विशेश्ताओं में प्रमुख था फिर अल्लाह ने मुहम्मद को बनी हाशिम से चुना और उनको आदम की संतान में सबसे बेहतर सरदार बनाया|   

  4. अल्लाह के रसूल मुहम्मद का उच्च आचरण: अल्लाह ने आपको बड़ी अच्छी आदतों वाला बनाया| आप नबुव्वत से पहले अपनी जाती बल्कि समस्त मानव जाती में अच्छे आचरण और स्वभाव में खरे होने में सबसे बेहतर थे| अनाथ के रूप में पले बढे और पवित्र फ़कीर के रूप में जवान हुए फिर आपने विवाह किया और अपनी जीवन साथी के लिए आप प्रीय व निष्टावान थे| आप और आप के पिता ने कुरैश के धार्मिक व सांसारिक मामलों में से किसी की निगरानी नहीं की और न ही वे कुरैश के लोगों जैसी उपासना करते थे और न उनकी बैठकों में जाते थे| आप से कोई ऐसी बात व काम साबित नहीं जिससे पता चलता हो कि आप सरदारी के इच्छुक हो| आप सच्चाई, ईमानदारी और उच्च आचरण के लिए प्रसिध्ध थे, इसी कारण नुबुव्वत के पहले ही आपको श्रेष्ठ सम्मान मिल गया था और कुरैश आपको अमीन (ईमानदार व्यक्ति) के नाम से पुकारते थे| आप इन्ही गुणों के साथ जवान हुए और आपके पाक शरीर और पवित्र नफस में समस्त अंग बड़े ऊंचे दर्जे तक पहुँचे, आपने कभी किसी माल, पद और ख्याति की इच्छा नहीं की यहाँ तक कि आपके पास अल्लाह की ओर से वही का आना आरम्भ हुआ|
  5. आप उम्मी थे:अर्थात आप लिखना पढ़ना नहीं जानते थे, आप की नबुव्वत की सच्चाई का सबसे बड़ा तर्क यह था कि आप ने कभी कोई पुस्तक नहीं पढ़ी और न एक पंक्ति लिखी और न कोई शेअर कहा और न कोई वाक्य लिखा| आप  महान दावत और न्याय प्रीय आसमानी शरीअत लेकर आए जिसने सामूहिक बिखराव व फूट को जड़ से उखाड दिया और अप ने मानने वालों को सदैव के लिए मानव सौभाग्य की ज़मानत दी और उन्हें उनके पालनहार के अलावा किसी अन्य की दासता से आज़ाद कराया| ये सारी चीज़ें नुबुव्वत के प्रमाण और उसकी सच्चाई के तर्क व दलीलें है|