अल्लाह के रसूल मुहम्मद ﷺ सबके लिए उत्तम आदर्श है


सारी मानवता के लिए अल्लाह के रसूल मुहम्मद उत्तम आदर्श है| आपके उत्तम आदर्श – आप आदर्शनीय पति, पिता, नाना थे| आप एक उत्तम नागरिक, न्यायाधीश एवं धार्मिक गुरु थे| आपकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि आप जो कहते थे उसे करते थे|   

आप ने अपने आस पास के लोगों को न्याय, प्रेम और मर्यादा का पाठ पढ़ाया| आपने मानवजाति को जो भाइचारगी की सीख दी, वह तो इतिहास का एक अनोखा उदहारण है| यह उत्तम लक्षण अल्लाह के रसूल मुहम्मद को अल्लाह ने प्रदान किया और आप ने अपने अनुयायियों को वास्तविक धर्म के तरफ बुलाया|     

क़ुरान

“(हे ईमान वालों!) तुम्हारे पास तुम्ही में से अल्लाह का एक रसूल आ गया है| उस को वह बात भारी लगती है जिस से तुम्हे दुःख हो| वह तुम्हारी सफलता की लालसा रखते है| और ईमान वालों के लिए करुणामय दयावान है|” [खुरआन सूरा तौबा 9:128]

“और (हे नबी!) हम ने आप को नहीं भेजा है किन्तु समस्त संसार के लिए दया बना कर|” [खुरआन सूरा अम्बिया 21:107]

बच्चों के प्रति दयालू

अनस रजिअल्लाहुअन्हु ने कहा कि,अल्लाह के रसूल मुहम्मद जब भी बच्चों के पास से गुज़रते, उनको सलाम किया करते थे| इसलिए वह (अनस रजिअल्लाहुअन्हु) भी बच्चों के पास से जब भी जाते, उन्हें सलाम किया करते थे| [बुखारी और मुसलिम]

इब्न अब्बास रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, जब भी नयी नसल आती तो उसे अल्लाह के रसूल मुहम्मद  अपने आँखों पर रखते, फिर अपने होटों पर रखते और कहते, “हे अल्लाह! जैसा कि आपने हमें इसका आरम्भ दिखाया, उसी तारीखे से उसका अंत भी दिखा|” उसके बाद अल्लाह के रसूल मुहम्मद अपने पास बैठे हुए किसी बच्चे को वह चीज़ दे देते| [तबरानी]

जब भी कोई अपने साथ किसी बच्चे को लेकर अल्लाह के रसूल मुहम्मद  के पास आता, तब आप उस बच्चे को अपने गोद में बिठा लेते| एक दिन एक बच्चे ने आप पर मूत्र कर दिया| आप ने कपडे के उस हिस्से को पानी से धो दिया| पूरा वस्त्र नहीं धोया| (क्यों कि वह दूध पीने वाला बच्चा था|) [बुखारी]

अल्लाह के रसूल मुहम्मद  कुछ बच्चों को श्रेणी में खड़ा किया करते थे| और बच्चों से कहते थे कि, “मैं तुम्हे फला फला चीज़ (तोहफा, भेंट) दूंगा, जो मेरे पास पहले पहुचे|” तब सब बच्चे आप की तरफ दौड़ते हुए आते और आप के पीठ पर, सीने पर गिरा करते थे| [अहमद]

स्त्रीयों के प्रति दयालु

एक बार अल्लाह के रसूल मुहम्मद  आइशा रजिअल्लाहुअन्हु के घर में अपना चहरा ढक कर सो रहे थे| वह ईद का दिन था| कुछ लड़कियां गा रही थी| उस समय अबू बकर रजिअल्लाहुअन्हु घर में आये और लड़कियों को चुप रहने को कहा| अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने ऐसा कहा : “उन्हें गाने दो, यह उनके ईद का दिन है|” [सही बुखारी 3931]   

अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने कहा : सबसे अच्छा मुसलिम वह है जो अपने व्यवहार में अच्छा हो; तुम में सब से अच्छा वह है जो अपने पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करे| [तिरमिज़ी vol 1, किताब 7, हदीस 1162]

अल्लाह के रसूल मुहम्मद  नेकहा : “जो कोई दो लड़कियों की अच्छी परवरिश करे, तो मैं और वो स्वर्ग में इस तरह प्रवेश होंगे| और अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने वर्णन करते हुए अपने दोनों उँगलियों (सूचित उँगली और बीच की उँगली) से इशारा किया| [तिरमिज़ी 1914]

अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने कहा : “एक विश्वासी (मुसलिम) पुरुष, एक विश्वासी स्त्री से द्वेष नहीं करना चाहिए| अगर वह स्त्री के किसी काम से नाराज़ हो, तो दूसरे काम से खुश भी होता है|” [सही मुसलिम, किताब 1, 275]

अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने कहा : “मैं नमाज़ आरम्भ करता हूँ, यह सोच के कि, लम्बी नमाज़ (देर तक नमाज़) पढूंगा| किन्तु जब कोई छोटे बच्चे की रोने की आवाज़ सुनता हूँ, तो तुरन्त नमाज़ छोटी कर देता हूँ| क्यों की मुझे पता है कि, जब बच्चे रोते है तो माँ का दिल तड़प उठता है|” [सही बुखारी और सही मुसलिम]