इस्लाम की खूबियाँ एवं अच्छाईयाँ


इस्लाम की खूबियों का इहाता करने से कलम निर्बल है, और इस दीन की उच्चताये एवं श्रेष्ठातायें संपूर्ण तरीके से बयान करने से शब्द कमज़ोर है, और दीन यह (धर्म) मात्र अल्लाह तआला का दीन है, जिस प्रकार से दृष्टि अल्लाह तआला का इदराक (सम्पूर्ण जानकारी) नहीं कर सकती और मनुष्य उस के ज्ञान (इल्म) का इहाता नहीं कर सकता है उसी प्रकार से कलम अल्लाह की शरीअत (क़ानून एवं क़ायदे) की खूबियों का इहाता नहीं कर सकती है|

इब्ने कैय्य्म रहिमहुल्लाह कहते है : “जब आप इस सीधे और सरल दीन, और मुहम्मद की शरीअत के अनुपम एवं अद्वितीय हिकमत पर चिंतन करेंगे – और मुहम्मद की शरीअत जिस के अच्छाई और खूबियों को शब्दों में नहीं बयान किया जा सकता है, और उसकी अच्छायियों का इदराक (सम्पूर्ण जानकारी) बयानों से नहीं लगाया जा सकता है, और न ही बुध्धिमान की बुध्धि उसकी बुलंदियों का अंदाज़ा कर सकती है| अगरचे उन में से सब से संपूर्ण लोगों की बुध्धियाँ इकट्ठी हो जाये, जबकि विद्वान् और पूर्ण बुध्धियां यह विचार करती है कि उन्होंने इस्लाम की खूबियों और अच्छाईयों का इदराक (सम्पूर्ण जानकारी) कर लिया, और उसकी श्रेष्ठता की गवाही दी, और यह कि दुनिया ने इस्लामी शरीअत से ज़्यादा संपूर्ण और इस से ज़्यादा स्वच्छ और इस से ज़्यादा महान शरीअत का दरवाज़ा ही नहीं खटखटाया है- तो आप को इसकी खूबी का अंदाजा हो जायेगा|

अगर अल्लाह के रसूल कोई दलील एवं तर्क न भी लाते तो तर्क और गवाही के लिए यही काफी था कि यह दीन अल्लाह की तरफ से है, और अल्लाह का पसंदीदा दीन है, और संसार की सारी चीज़े उस (अल्लाह के सम्पूर्ण इल्म) की गवाही देती है| संसार की सारी चीज़ें अल्लाह के सम्पूर्ण इल्म, सम्पूर्ण हिक्मत, अत्यधिक दया एवं करुणा, नेकी और उपकार, गैब और हाज़िर का संपूर्ण इल्म या जानकारी, नियम और परिणाम एवं अंजाम की जानकारी, आदि की गवाही देते है और यह अल्लाह का सब से उच्च एवं महान वरदान है जो उस ने अपने बन्दों के साथ उपकार या वरदान किया है| बंदो पर अल्लाह का सब से महान वरदान यह है कि उसने अपने (दीन) इस्लाम के द्वारा लोगों की हिदायत (निर्देश) की, और उस ने लोगों को उसके योग्य बनाया, और उन के लिए इस को (इस्लाम) पसंद किया| यही कारण है कि उस (अल्लाह) ने अपने बन्दों पर उपकार करते हुए उनको उसकी (इस्लाम) की हिदायत (निर्देश) की| अल्लाह तआला का फ़रमान है :

“बेशक मुसलमानों पर अल्लाह का उपकार (एहसान) है कि उसने उन्ही में से एक रसूल उन में भेजा जो उन्हें उसकी आयतें पढ़कर सुनाता है और उन्हें पाक करता है, और उन्हें किताब और सूझ-बूझ सिखाता है, और बेशक यह सब उस से पहले वाज़ेह तौर से भटके हुए थे|” [खुरआन सूरा आले इमरान 3:164]

और अल्लाह तआला अपने बन्दों का परिचय कराते हुए और अपने महान वरदानों को याद दिलाते हुए, और उन वरदानों के प्रति उन पर धन्यवाद प्राप्त करते हुए फरमाता है :

“आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे दीन को मुकम्मल कर दिया|” [सूरा मईदा 5:3]

इस दीन (धर्म) के प्रति हम अल्लाह का धन्यवाद ऐडा करते हुए दीन इस्लाम की कुछ खूबियों को संक्षेप में वर्णन कर रहे है :

इस्लाम अल्लाह का दीन है

यह वही दीन है जिसे अल्लाह तआला ने अपने लिए पसंद किया है, और इस को देकर रसूलों को भेजा, और अपनी मख़लूक़ को यह आदेश दिया कि उसके दीन के द्वारा उस की पूजा एवं इबादत करे, जिस तरह से खालिक़ (ईश्वर) और मख़लूक़ के बीच मुशाबहत (समानता) नहीं की जा सकती उसी प्रकार अल्लाह के दीन और लोगों के बनाये हुए क़ानून और उन के धर्मों के बीच मुशाबहत (समानता) संभव ही नहीं है|

जिस प्रकार अल्लाह तआला ने अपने आप को पूर्णतः कमाल के गुण से मुत्तासिफ(विशेष रुप से प्रदर्शित)किया है,  

उसी प्रकार उसका दीन पूर्णतः कमाल का हामिल है| उन क़ानूनों एवं कायदों को पूरा करने में जिस से लोगों की दुनिया एवं आखिरत दोनों की सुधार हो सके और उनमे दोनों जहाँ का लाभ मौजूद हो, और जो खालिक (अल्लाह) के हुखूख और बन्दों के वाजिबात (आवश्यक चीज़ों) और लोगों का हक़ एक दूसरे के प्रति और इसी प्रकार एक-दूसरे के (वाजिबात) की जानकारी देता है|

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